नमस्ते, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सम्मानित शिक्षकगण, हमारे प्यारे अभिभावक, और मेरे सभी सहपाठियों।
आज 26 जनवरी का शुभ दिन है। यह वह दिन है जब हमारा भारत गणतंत्र बना। मैं [आपका नाम] इस खास मौके पर आप सभी का दिल से स्वागत करता/करती हूं। आज का दिन हम सबके लिए गर्व और खुशी का दिन है।
आइए, इस शानदार दिन की शुरुआत करते हैं। सबसे पहले, मैं आपसे अनुरोध करता/करती हूं कि सभी खड़े होकर हमारे राष्ट्रगान “जन गण मन” के लिए तैयार हो जाएं।
(राष्ट्रगान के बाद)
धन्यवाद। यह पल हर भारतीय को गर्वित महसूस कराता है। अब, मैं आपको इस खास दिन के महत्व के बारे में बताना चाहता/चाहती हूं।
हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ, लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया और एक गणतंत्र देश बना। आज हम न केवल अपनी आजादी को बल्कि अपने संविधान को भी सलाम करते हैं, जिसने हमें अधिकार और कर्तव्यों का रास्ता दिखाया।
अब मैं इस खास मंच पर हमारे सम्मानित प्रधानाचार्य जी को आमंत्रित करता/करती हूं कि वे अपने प्रेरणादायक शब्दों से हमें संबोधित करें।
(प्रधानाचार्य का भाषण)
धन्यवाद, सर/मैम। आपके शब्द हमेशा हमें प्रोत्साहित करते हैं। अब, मैं आप सभी के साथ एक छोटी-सी कहानी साझा करना चाहूंगा/चाहूंगी।
कहानी का नाम है “एकता में शक्ति”। एक बार की बात है, एक गांव में कई किसान रहते थे। वे हमेशा आपस में झगड़ते रहते थे। एक दिन, गांव के सबसे बुजुर्ग किसान ने सबको बुलाया और एक लकड़ी का गट्ठर दिया। उसने कहा, “इसे तोड़ो।” किसी से नहीं टूटा। फिर उसने लकड़ियों को अलग किया और कहा, “अब तोड़ो।” सभी ने आसानी से तोड़ दिया। तब बुजुर्ग ने कहा, “अगर हम सब एक साथ रहेंगे, तो कोई हमें तोड़ नहीं सकेगा।”
यह कहानी हमें सिखाती है कि हम सभी को एक साथ रहना चाहिए और अपने देश के लिए काम करना चाहिए।
अब, मंच पर एक अद्भुत कविता पेश की जाएगी। हमारे साथी [कविता प्रस्तुत करने वाले का नाम] आपके सामने कविता “वतन हमारा” सुनाएंगे।
(कविता प्रस्तुत)
वाह! यह कविता हमारे दिलों को छू गई। धन्यवाद, [कविता प्रस्तुत करने वाले का नाम]।
अब मंच पर हमारे कुछ साथी एक छोटा-सा नाटक प्रस्तुत करेंगे, जिसमें हमें गणतंत्र की असली भावना दिखाई जाएगी।
(नाटक प्रस्तुत)
इस नाटक ने हमें सिखाया कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने देश को बेहतर बनाए। धन्यवाद, दोस्तों, इस सुंदर प्रस्तुति के लिए।
अब हम सब मिलकर देशभक्ति गीत “सारे जहां से अच्छा” गायेंगे। आइए, सभी इसका हिस्सा बनें।
(गीत प्रस्तुत)
हमारा कार्यक्रम अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। लेकिन उससे पहले, मैं एक छोटी-सी पहेली पूछना चाहता/चाहती हूं।
“जिसे फहराते ही गर्व महसूस हो, वह क्या है?”
(उत्तर: तिरंगा)
बिल्कुल सही! हमारे तिरंगे की शान को हमेशा ऊंचा रखना है।
अब समय है धन्यवाद ज्ञापन का। मैं अपने सभी शिक्षकों और छात्रों को धन्यवाद देता/देती हूं, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाया।
आज का दिन हमें अपने अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है। आइए, एक साथ प्रतिज्ञा करें कि हम अपने भारत को और महान बनाएंगे।
जय हिंद!
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